"दीप" सुनाये गीत

Saturday, January 12, 2013

मैं वही हूँ कोई और तो नहीं।

क्यों हाल-ए -दिल ना पूछूं तुमसे,
तुम हमराज थे मेरे  कोई गैर तो नहीं,
ऐसे भी अनजान न बनो, जिस के अश्क भी,
तुमने अपने लबों से रोके थे , मैं वही हूँ कोई और तो नहीं।

कैसे भुला दूं, वो दिन वो रात जब थे हम और तुम साथ
लबों को छूते तुम्हारे हाथ,छत की मुंडेरों पे सर्दी की रात,


 कैसे भुला दो मैं, वो दिन वो रात ....

वो बदली हवायें और उड़ते जज्बात,
गालों पे थप्पड़ बिन कोई बात,
जब पूछ लेते हैं तुम्हारे बारे में यार,
कैसा है तेरा पहला प्यार,

सुलगने लगती हैं चिंगारी तुम्हारी यादों के साथ,
उड़ता है है धुंआ अकेली रातों के साथ,
आँखें पड़ गयी हैं पीली और कोयले हुए हाथ,
कैसे भुला दूं मैं वो दिन वो रात। 

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