"दीप" सुनाये गीत

Saturday, January 12, 2013

मेरे छंद

मुझ को कवि बनाया तुमने , पर कविता मेरी बन न सकी,
मेरे छंदों के हर  शब्द तुम ही हो, पर पंक्तियाँ तुम बन न सकी।

मेरी सांसों का राग तुम्ही से, पर राग ये मेरे तुम सुन न सकी,
चित्त गगन में थे चित्र तुम्हारे, चित्रों में रंग तुम भर न सकी।

दिवा स्वपनों में देखा तुमको, रात्रि स्वप्न में ढूँढा तुमको,
भीगी चिड़िया मेरे सपनों की, लाख जतन तुम उड़ ना सकी।

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