हर रंग जिया है जीवन में, फिर भी कुछ रीता रीता हूँ,
तुम चले गए जो मीत मेरे,क्षण एक एक युग सा जीता हूँ,
सौ सौ भरे हैं प्याले मय के, मैं रिन्द नहीं जो बहक जाऊँ,
पी ली मद जो तेरे यौवन की, अब ना सम्भले संभाल पाऊँ,
है हवा ये तेरे इश्क़ की, जादू -बला या सज़ा समझूँ,
तू क़ैद भी करे न मुझ को, मैं भी फ़रार न होता हूँ,
हर रंग जिया है जीवन में......
तुम चले गए जो मीत मेरे,क्षण एक एक युग सा जीता हूँ,
सौ सौ भरे हैं प्याले मय के, मैं रिन्द नहीं जो बहक जाऊँ,
पी ली मद जो तेरे यौवन की, अब ना सम्भले संभाल पाऊँ,
है हवा ये तेरे इश्क़ की, जादू -बला या सज़ा समझूँ,
तू क़ैद भी करे न मुझ को, मैं भी फ़रार न होता हूँ,
हर रंग जिया है जीवन में......
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