चाँद से सिफारिश की है तुम्हे पास लाने की,
क्यूं खुदा ने बख्शी है दूरियां जमाने की।
साँसों में जाने क्या कशिश सी छा जाती है,
तस्वीर उभर कर तुम्हारी, जब खयालों में आ जाती है।
तमन्ना है उस तस्वीर में रंग सजाने की,
तितलियों से सिफारिश की है,फूलों से रंग लाने की।
रंग तुम्हारे होठों का अपने होठों पे लगा लूं मैं,
हर धड़कन तुम्हारी दिल में और सांस सीने में छुपा लूं मैं,
तमन्ना है तुम्हारी साँसों से सुर मिलाने की,
गुजारिश की है मैंने भँवरे से साज बनाने की।
भँवरे की साज पे जब, तुम गीत सुनाती हो
धड़कन बढ़ने लगती हैं तुम सीन से लग जाती हो,
तमन्ना है मेरी, तुम्हे सीने में छुपाने की
सिफारिश पतंगों से की है,एक चिलमन बनाने की।
यूँ तो ख्यालों में मिलना भी सह नहीं पाती हो,
कुछ बात जो साथ सोने पे भी कह नहीं पाती हो,
तमन्ना की है वो अनकहे,अल्फाज सुनने की,
गुजारिश की है आसमां से, वो बात बुनने की।
बदन तपने लगता है, हर अंग तड़पने लगता है,
पास आने के ही ख़याल से, उर धधकने लगता है,
तमन्ना की है इन दूरियों से और न तडपाने की,
ख्वाहिश की है मैंने वक्त से, दौड़ लगाने की।
चाँद तुम्हारी छत पर आएगा एक दिन,
वक्त दौड़ लगा के भी तुम्हे लाएगा एक दिन,
होंगी तुम बाहों में गुजारिश चाँद को करूँगा ,
जुगुनुओं को बुला लाने की,
ख्वाहिश वक्त से करूँगा,
बस यही थम जाने की, यही थम जाने की , यही थम जाने की।
क्यूं खुदा ने बख्शी है दूरियां जमाने की।
साँसों में जाने क्या कशिश सी छा जाती है,
तस्वीर उभर कर तुम्हारी, जब खयालों में आ जाती है।
तमन्ना है उस तस्वीर में रंग सजाने की,
तितलियों से सिफारिश की है,फूलों से रंग लाने की।
रंग तुम्हारे होठों का अपने होठों पे लगा लूं मैं,
हर धड़कन तुम्हारी दिल में और सांस सीने में छुपा लूं मैं,
तमन्ना है तुम्हारी साँसों से सुर मिलाने की,
गुजारिश की है मैंने भँवरे से साज बनाने की।
भँवरे की साज पे जब, तुम गीत सुनाती हो
धड़कन बढ़ने लगती हैं तुम सीन से लग जाती हो,
तमन्ना है मेरी, तुम्हे सीने में छुपाने की
सिफारिश पतंगों से की है,एक चिलमन बनाने की।
यूँ तो ख्यालों में मिलना भी सह नहीं पाती हो,
कुछ बात जो साथ सोने पे भी कह नहीं पाती हो,
तमन्ना की है वो अनकहे,अल्फाज सुनने की,
गुजारिश की है आसमां से, वो बात बुनने की।
बदन तपने लगता है, हर अंग तड़पने लगता है,
पास आने के ही ख़याल से, उर धधकने लगता है,
तमन्ना की है इन दूरियों से और न तडपाने की,
ख्वाहिश की है मैंने वक्त से, दौड़ लगाने की।
चाँद तुम्हारी छत पर आएगा एक दिन,
वक्त दौड़ लगा के भी तुम्हे लाएगा एक दिन,
होंगी तुम बाहों में गुजारिश चाँद को करूँगा ,
जुगुनुओं को बुला लाने की,
ख्वाहिश वक्त से करूँगा,
बस यही थम जाने की, यही थम जाने की , यही थम जाने की।
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