"दीप" सुनाये गीत

Thursday, November 10, 2016

शहर

शहर की भी आवाज़ होती है,
ना ये सोती है ना ये खोती है,
मैं जहाँ हूँ वहाँ पसरा है सन्नाटा,
पदचाप सुनायी देती है, साँस सुनायी देती है
बहता पानी, उड़ता तीतर
शहर बाहर है या है इस के भीतर,
और ही हैं आवाज़ें इस की
जो शहर से बाहर सुनायी देती हैं
और यहाँ आ कर खोती हैं
शहर की भी आवाज़ें होती हैं ।

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